महिला आरक्षण बिल पर घमासान, मनोहर लाल खट्टर का विपक्ष पर बड़ा हमला
- By Gaurav --
- Sunday, 19 Apr, 2026
Row Over Women’s Reservation Bill:
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और ‘आप’ समेत विपक्षी दलों ने बिल को पास होने से रोककर देश की आधी आबादी के खिलाफ साजिश की है। खट्टर ने इसे “भ्रूण हत्या जैसा पाप” बताते हुए कहा कि इसका जवाब जनता चुनाव में देगी।
महिला अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भाजपा ने देशभर में जन-आक्रोश अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत खट्टर और उत्तर प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्य जालंधर पहुंचे।
खट्टर ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा महिलाओं की भागीदारी में बाधा डाली है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था और इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करने का लक्ष्य रखा गया था। खट्टर के अनुसार, कोविड-19 के कारण जनगणना में देरी होने से परिसीमन नहीं हो सका, जिसके चलते संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता पड़ी।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद संवैधानिक संशोधन के लिए दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है, जो विपक्ष के विरोध के कारण नहीं मिल सका। खट्टर ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राजनीतिक हितों के चलते महिलाओं के अधिकारों को पीछे धकेला है।
इस मौके पर बेबी रानी मौर्य ने भी विपक्षी दलों—कांग्रेस, आप, सपा और डीएमके—पर महिलाओं का हक छीनने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। *1979 से महिलाओं को नीति-निर्माण में अधिकार देने के प्रयास शुरू हुए थे, पंचायती राज में इसे 50% तक दिया गया।
*1996 में देवगौड़ा सरकार ने महिला बिल (81वां संशोधन) लोकसभा में पेश किया, लेकिन पास नहीं हुआ।
*1998 से 2003: अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने चार बार बिल पास कराने की कोशिश की।
*2010: मनमोहन सिंह सरकार महिला आरक्षण बिल लाई, लेकिन सफल नहीं हो सकी, हालांकि राज्यसभा में यह पास हो गया था।
*2023: नरेंद्र मोदी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संशोधन) के तहत संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण पास कराया।
*2026: नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पेश किया गया, लेकिन आवश्यक संवैधानिक संशोधन को विपक्षी पार्टियों ने पास नहीं होने दिया।